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पुस्तक की प्रस्तावना पद्मभूषण, लोकेश चंद्र द्वारा लिखी गई है. उन्होंने कहा कि, ‘हजारों मन के फूलों से रचित यह किताब सदियों के सोने में लिपटी हुई है. यह बुलेट ट्रेन में संस्कृति की यात्रा है.’
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