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जीवन को ज्यों का त्यों, सहज किंतु आह्लादकारी तरीके से, शब्दों में पकड़ने की इच्छा घुल जाए तो उसका परिणाम संदीप भूतोड़िया की 'कैलकटास्केपः म्यूजिंग्स ऑफ ए ग्लोबट्रॉटर' के रूप में सामने आता है
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