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कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन से किसानों की मांग भले ही अभी तक पूरी न हुई हो, लेकिन सामाजिक और राजनीतिक चेतना जरूर जगा दी है. किसान आंदोलन के चलते लोग अपनी पुरानी रंजिश और अदावत भुलाकर एक साथ आकर खड़े नजर आ रहे हैं. साल 2013 में मुजफ्फरनगर दंगे ने जाट और मुस्लिम के बीच गहरी खाई पैदा कर दी, जो अब सात साल के बाद पटती दिख रही है. यही वजह है कि किसान आंदोलन में जाटों और मुस्लिमों की तादाद बढ़ रही है.
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