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वैसे शिंदे एक जमाने में शरद पवार के करीबी माने जाते थे, एक वक्त 1978 में उन्होंने पवार के साथ कांग्रेस छोड़ी भी थी लेकिन पवार के कांग्रेस में लौटने से पहले ही उन्होंने अपनी घर वापसी कर ली और वे उसके बाद से कांग्रेस और गांधी परिवार के निष्ठावान माने जाते रहे.
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