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चाचा-भतीजा जंग की स्क्रिप्ट तो उसी समय लिखनी शुरू हो गई थी, जब रामविलास पासवान ने अपने बेटे चिराग को पार्टी की कमान सौंप दी थी. आग में घी तब पड़ा, जब चिराग ने विधानसभा चुनाव में जेडीयू के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया. पशुपति पारस इस फैसले से घायल थे तो वहीं जेडीयू घात में थी. मौका मिला तो चाचा ने पार्टी में तख्ता पलट कर दिया. देखें ये रिपोर्ट.
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