जयंती विशेषः प्रेमचंद की महाकाव्यात्मक कृति है गोदान
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'रामचरितमानस' में अगर कल का हिंदुस्तान है तो 'गोदान' में आज का हिंदुस्तान है और यों 'गोदान' मानो 'रामचरितमानस' की अगली कड़ी है.
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