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यह कहानी है मूल रूप से मुरैना के रहने वाले दिहाड़ी मजदूर अमृतलाल की. अमृतलाल के तीन बेटे हैं और उनकी पढ़ाई के लिए अमृतलाल को जहां खूब सारा कर्ज लेना पड़ा तो वहीं पुश्तैनी जमीन भी साहूकार के पास गिरवी रखनी पड़ी. बेटों ने मन लगाकर पढ़ाई की और आज तीनों बेटे पायलट हैं.
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