उम्दा है आईपीएस प्रवीण कुमार का संग्रह 'वह एक और मन'
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पुलिसिया पेशे में ज़िन्दगी बहुत मसरूफ़ होती है मगर तजुर्बे भी मीलों लंबे होते हैं. सच को सच कहने की क़ुव्वत रखने वाले पुलिस अफसर प्रवीण कुमार का यह कविता संकलन तो यही बताता है.
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