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राजेश जोशी एक कवि के रूप में यह ध्यान रखते हैं कि उनकी कविता विचारधारा की जड़ मशीनरी से निकली युक्ति या उक्ति न बन जाए. तभी तो कुछ कविताएं यहां ऐसी हैं जो शब्द में नए अर्थ का संधान करती हैं. अर्थविस्तार करती हैं. अपने अभिप्रायों में खिलती हैं.
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