संस्मरण: रामविलास शर्मा के शब्द मेरे लिए राह बन गए

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हिंदी साहित्य और आलोचना का विशाल हिमालय मेरे सामने खड़ा था. मैंने उनके पैर छुए, तो उनके मुंह से निकला, 'लिखो, खूब लिखो...खूब अच्छा लिखो'...हिंदी के सर्वाधिक प्रतिष्ठित आलोचकों में से एक, संस्कृति चिंतक और सभ्यता विचारक, डॉ रामविलास शर्मा की जयंती पर प्रकाश मनु की यादें

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