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फायांस का नियम

फायांस का नियम

फायांस का नियम :- जब एक धनायन किसी ऋण के संपर्क में आता है तो आयनिक यौगिक बनते हैं परंतु धनायन एवं ऋण आयन के आकार में विकृति उत्पन्न हो जाती है धनायन का कुछ भाग ऋण आयन में तथा ऋण का कुछ भाग धनायन में प्रवेश कर जाता है जिससे योगिक में सह संयोजक लक्षण आ जाते हैं जिसे फायांस का नियम कहते हैं ।

सह संयोजक गुणों में निम्न कारणों से वृद्धि होती है :-

धनायन का आकार :-

धनायन का आकार जितना छोटा होता है वह ऋण आयन को उतना ही अधिक ध्रुवण करता है एवं सह संयोजक लक्षणों में वृद्धि होती है |

ऋण आयन का आकार :- ऋण आयन का आकार अधिक होने पर वह अधिक ध्रुवित होगा तथा सह संयोजक लक्षणों में वृद्धि होगी |

धनायन व ऋण आयन पर आवेश :- धनायन व ऋण आयन पर आवेश बढ़ने के कारण ध्रुवण क्षमता में वृद्धि हो जाती हैं जिससे सहसंयोजक गुणों में वृद्धि हो जाती है ।

वे धनायन अधिक ध्रुवण करते हैं जिन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास छदम अक्रिय विन्यास के समान होता है |