| जिला कोड | जिला नाम | मुख्यालय |
|---|---|---|
| AH | अहमदाबाद | अहमदाबाद |
| AM | अमरेली | अमरेली |
| AN | आणंद | आणंद |
| BK | बनासकांठा | पालनपुर |
| BR | भरुच | भरुच |
| BV | भावनगर | भावनगर |
| DA | दाहोद | दाहोद |
| DG | डांग | आहवा |
| GA | गांधीनगर | गांधीनगर |
| JA | जामनगर | जामनगर |
| JU | जूनागढ | जूनागढ |
| KA | कच्छ | भुज |
| KH | खेड़ा | नड़ियाद |
| MA | महेसाणा | महेसाणा |
| NR | नर्मदा | राजपीपळा |
| NV | नवसारी | नवसारी |
| PA | पाटण | पाटण |
| PM | पंचमहाल | गोधरा |
| PO | पोरबंदर | पोरबंदर |
| RA | राजकोट | राजकोट |
| SK | साबरकांठा | हिंमतनगर |
| SN | सुरेन्द्रनगर | सुरेन्द्रनगर |
| ST | सुरत | सुरत |
| TA | तापी | व्यारा |
| VD | वड़ोदरा | वड़ोदरा |
| VL | वलसाड | वलसाड |
| DD | देवभूमि द्वारका | द्वारका |
| GS | गीर सोमनाथ | वेरावल |
| MR | मोरबी | मोरबी |
| BT | बोटाद | बोटाद |
| AR | अरवल्ली | मोड़ासा |
| MS | महीसागर | लुणावाड़ा |
| CU | छोटा उदेपुर | छोटा उदेपुर |
गुजरात के जिले
प्राचीन भारत के प्रमुख शास्त्र
प्राचीन समय में न आफसेट प्रिंटिंग की मशीने थीं, न स्क्रिन प्रिटिंग की। न ही इंटरनेट था जहां किसी भी विषय पर असंख्य सूचनाएं उपलब्ध होती हैं। फिर भी प्राचीन काल के ऋषि-मुनियों ने अपने पुरुषार्थ, ज्ञान और शोध की मदद से कई शास्त्रों की रचना की और उसे विकसित भी किया। इनमें से कुछ प्रमुख शास्त्रों का विवेचन प्रस्तुत है-
आयुर्वेदशास्त्र :-
आयुर्वेद शास्त्र का विकास उत्तरवैदिक काल में हुआ। इस विषय पर अनेक स्वतंत्र ग्रंथों की रचना हुई। भारतीय परंपरा के अनुसार आयुर्वेद की रचना सबसे पहले ब्रह्मा ने की। ब्रह्मा ने प्रजापति को, प्रजापति ने अश्विनी कुमारों को और फिर अश्विनी कुमारों ने इस विद्या को इन्द्र को प्रदान किया। इन्द्र के द्वारा ही यह विद्या सम्पूर्ण लोक में विस्तारित हुई। इसे चार उपवेदों में से एक माना गया है। कुछ विद्वानों के अनुसार यह ऋग्वेद का उपवेद है तो कुछ का मानना है कि यह ‘अथर्ववेद’ का उपवेद है। आयुर्वेद की मुख्य तीन परम्पराएं हैं- भारद्वाज, धनवन्तरि और काश्यप। आयुर्वेद विज्ञान के आठ अंग हैं- शल्य, शालाक्य, कायचिकित्सा, भूतविधा, कौमारमृत्य, अगदतन्त्रा, रसायन और वाजीकरण। चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, काश्यप संहिता इसके प्रमुख ग्रंथ हैं जिन पर बाद में अनेक विद्वानों द्वारा व्याख्याएं लिखी गईं। आयुर्वेद के सबसे महत्वपूर्ण ग्रन्थ चरकसंहिता के बारे में ऐसा माना जाता है कि मूल रूप से यह ग्रन्थ आत्रेय पुनर्वसु के शिष्य अग्निवेश ने लिखा था। चरक ऋषि ने इस ग्रन्थ को संस्कृत में रूपांतरित किया। इस कारण इसका नाम चरक संहिता पड़ गया। बताया जाता है कि पतंजलि ही चरक थे। इस ग्रन्थ का रचनाकाल ईं. पू. पांचवी शताब्दी माना जाता है।
रसायनशास्त्र :-
रसायनशास्त्र का प्रारंभ वैदिक युग से माना गया है। प्राचीन ग्रंथों में रसायनशास्त्र के ‘रस’ का अर्थ होता था-पारद। पारद को भगवान शिव का वीर्य माना गया है। रसायनशास्त्र के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के खनिजों का अध्ययन किया जाता था। वैदिक काल तक अनेक खनिजों की खोज हो चुकी थी तथा उनका व्यावहारिक प्रयोग भी होने लगा था। परंतु इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा काम नागार्जुन नामक बौद्ध विद्वान ने किया। उनका काल लगभग 280-320 ई. था। उन्होंने एक नई खोज की जिसमें पारे के प्रयोग से तांबा इत्यादि धातुओं को सोने में बदला जा सकता था। रसायनशास्त्र के कुछ प्रसिद्ध ग्रंथों में एक है रसरत्नाकर। इसके रचयिता नागार्जुन थे। इसके कुल आठ अध्याय थे परंतु चार ही हमें प्राप्त होते हैं। इसमें मुख्यत: धातुओं के शोधन, मारण, शुद्ध पारद प्राप्ति तथा भस्म बनाने की विधियों का वर्णन मिलता है। प्रसिद्ध रसायनशास्त्री श्री गोविन्द भगवतपाद जो शंकराचार्य के गुरु थे, द्वारा रचित ‘रसहृदयतन्त्र’ ग्रंथ भी काफी लोकप्रिय है। इसके अलावा रसेन्द्रचूड़ामणि, रसप्रकासुधाकर रसार्णव, रससार आदि ग्रन्थ भी रसायनशास्त्र के ग्रन्थों में ही गिने जाते हैं।
ज्योतिषशास्त्र :-
ज्योतिष वैदिक साहित्य का ही एक अंग है। इसमें सूर्य, चन्द्र, पृथ्वी, नक्षत्र, ऋतु, मास, अयन आदि की स्थितियों पर गंभीर अध्ययन किया गया है। इस विषय में हमें ‘वेदांग ज्योतिष’ नामक ग्रंथ प्राप्त होता है। इसके रचना का समय 1200 ई. पू. माना गया है। आर्यभट्ट ज्योतिष गणित के सबसे बड़े विद्वान के रूप में माने जाते हैं। एक अनुमान के अनुसार इनका जन्म 476 ई. में पटना (कुसुमपुर) में हुआ था। मात्र 23 वर्ष की उम्र में इन्होंने ‘आर्यभट्टीय’ नामक प्रसिद्ध ज्योतिष ग्रंथ की रचना की। इस ग्रंथ में पूरे 121 श्लोक हैं। इसे चार खण्डों में बांटा गया है- गीतिकापाद, गणितपाद, कालक्रियापाद और गोलपाद। वराहमिहिर के उल्लेख के बिना तो भारतीय ज्योतिष की चर्चा अधूरी है। इनका समय छठी शताब्दी ई. के आरम्भ का है। इन्होंने चार प्रसिद्ध ग्रंथों की रचना की- पंचसिद्धान्तिका, वृहज्जातक, वृहदयात्रा तथा वृहत्संहिता जो ज्योतिष को समझने में मदद करती हैं।
गणितशास्त्र :-
प्राचीन काल से ही भारत में गणितशास्त्र का विशेष महत्व रहा है। यह सभी जानते हैं कि शून्य एवं दशमलव की खोज भारत में ही हुई। यह भारत के द्वारा विश्व को दी गई अनमोल देन है। इस खोज ने गणितीय जटिलताओं को खत्म कर दिया। गणितशास्त्र को मुख्यत: तीन भागों में बांटा गया है। अंकगणित, बीजगणित और रेखागणित। वैदिक काल में अंकगणित अपने विकसित स्वरूप में स्थापित था। ‘यजुर्वेद’ में एक से लेकर 10 खरब तक की संख्याओं का उल्लेख मिलता है। इन अंकों को वर्णों में भी लिखा जा सकता था। बीजगणित का साधारण अर्थ है, अज्ञात संख्या का ज्ञात संख्या के साथ समीकरण करके अज्ञात संख्या को जानना। अंग्रेजी में इसे ही अलजेब्रा कहा गया है। भारतीय बीजगणित के अविष्कार पर विवाद था। कुछ विद्वानों का मानना था इसके अविष्कार का श्रेय यूनानी विद्वान दिये फान्तस को है। परंतु अब यह साबित हो चुका है कि भारतीय बीजगणित का विकास स्वतंत्र रूप से हुआ है और इसका श्रेय भारतीय विद्वान आर्यभट्ट (446 ई.) को जाता है। रेखागणित का अविष्कार भी वैदिक युग में ही हो गया था। इस विद्या का प्राचीन नाम है- शुल्वविद्या या शुल्वविज्ञान। अनेक पुरातात्विक स्थलों की खुदाई में प्राप्त यज्ञशालाएं, वेदिकाएं, कुण्ड इत्यादि को देखने तथा इनके अध्ययन करने पर हम पाते हैं कि इनका निर्माण रेखागणित के सिद्धांत पर किया गया है। ब्रह्मस्फुट सिद्धांत, नवशती, गणिततिलक, बीजगणित, गणितसारसंग्रह, गणित कौमुदी इत्यादि गणित शास्त्र के प्रमुख ग्रन्थ हैं।
कामशास्त्र :-
भारतीय समाज में पुरुषार्थ का काफी महत्व है। पुरुषार्थ चार हैं- धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष। काम का इसमें तीसरा स्थान है। सर्वप्रथम नन्दी ने 1000 अध्यायों का ‘कामशास्त्र’ लिखा जिसे बाभ्रव्य ने 150 अध्यायों में संक्षिप्त रूप में लिखा। कामशास्त्र से संबंधित सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ है ‘कामसूत्र’ जिसकी रचना वात्स्यायन ने की थी। इस ग्रंथ में 36 अध्याय हैं जिसमें भारतीय जीवन पद्धति के बारे में बताया गया है। इसमें 64 कलाओं का रोचक वर्णन है। इसके अलावा एक और प्रसिद्ध ग्रंथ है ‘कुहनीमत’ जो एक लघुकाव्य के रूप में है। कोक्कक पंडित द्वारा रचित रतिरहस्य को भी बेहद पसंद किया जाता है।
संगीतशास्त्र :-
भारतीय परंपरा में भगवान शिव को संगीत तथा नृत्य का प्रथम अचार्य कहा गया है। कहा जाता है के नारद ने भगवान शिव से ही संगीत का ज्ञान प्राप्त किया था। इस विषय पर अनेक ग्रंथ प्राप्त होते हैं जैसे नारदशिक्षा, रागनिरूपण, पंचमसारसंहिता, संगीतमकरन्द आदि। संगीतशास्त्र के प्रसिद्ध आचार्यों में मुख्यत: उमामहेश्वर, भरत, नन्दी, वासुकि, नारद, व्यास आदि की गिनती होती है। भरत के नाटयशास्त्र के अनुसार गीत की उत्पत्ति जहां सामवेद से हुई है, वहीं यजुर्वेद ने अभिनय (नृत्य) का प्रारंभ किया।
धर्मशास्त्र :-
प्राचीन काल में शासन व्यवस्था धर्म आधारित थी। प्रमुख धर्म मर्मज्ञों वैरवानस, अत्रि, उशना, कण्व, कश्यप, गार्ग्य, च्यवन, बृहस्पति, भारद्वाज आदि ने धर्म के विभिन्न सिद्धांतों एवं रूपों की विवेचना की है। पुरुषार्थ के चारों चरणों में इसका स्थान पहला है। उत्तर काल में लिखे गये संग्रह ग्रंथों में तत्कालीन समय की सम्पूर्ण धार्मिक व्यवस्था का वर्णन मिलता है। स्मृतिग्रंथों में मनुस्मृति, याज्ञवल्कय स्मृति, पराशर स्मृति, नारदस्मृति, बृहस्पतिस्मृति में लोकजीवन के सभी पक्षों की धार्मिक दृष्टिकोण से व्याख्या की गई है तथा कुछ नियम भी प्रतिपादित किये गये हैं।
अर्थशास्त्र :-
चार पुरुषार्थो में अर्थ का दूसरा स्थान है। महाभारत में वर्णित है कि ब्रह्मा ने अर्थशास्त्र पर एक लाख विभागों के एक ग्रंथ की रचना की। इसके बाद शिव (विशालाक्ष) ने दस हजार, इन्द्र ने पांच हजार, बृहस्पति ने तीन हजार, उशनस ने एक हजार विभागों में इसे संक्षिप्त किया। अर्थशास्त्र के अंतर्गत केवल वित्त संबंधी चर्चा का ही उल्लेख नहीं किया गया है। वरन राजनीति, दण्डनीति और नैतिक उपदेशों का भी वृहद वर्णन मिलता है। अर्थशास्त्र का सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ है कौटिल्य का अर्थशास्त्र। इसकी रचना चाणक्य ने की थी। चाणक्य का जीवन काल चतुर्थ शताब्दी के आस-पास माना जाता है। कौटिल्य अर्थशास्त्र में धर्म, अर्थ, राजनीति, दण्डनीति आदि का विस्तृत उपदेश है। इसे 15 अधिकरणों में बांटा गया है। इसमें वेद, वेदांग, इतिहास, पुराण, धार्मशास्त्र, अर्थशास्त्र, ज्योतिष आदि विद्याओं के साथ अनेक प्राचीन अर्थशास्त्रियों के मतों के साथ विषय को प्रतिपादित किया गया है। इसके अलावा अन्य महत्वपूर्ण ग्रंथ है कामन्दकीय नीतिसार, नीतिवाक्यामृत, लघुअर्थनीति इत्यादि।
प्रौद्योगिकी ग्रन्थ :-
'भृगुशिल्पसंहिता' में 16 विज्ञान तथा 64 प्रौद्योगिकियों का वर्णन है। इंजीनियरी प्रौद्योगिकियों के तीन 'खण्ड' होते थे। 'हिन्दी शिल्पशास्त्र' नामक ग्रन्थ में कृष्णाजी दामोदर वझे ने 400 प्रौद्योगिकी-विषयक ग्रन्थों की सूची दी है, जिसमें से कुछ निम्नलिखित हैं- विश्वमेदिनीकोश, शंखस्मृति, शिल्पदीपिका, वास्तुराजवल्लभ, भृगुसंहिता, मयमतम्, मानसार, अपराजितपृच्छा, समरांगणसूत्रधार, कश्यपसंहिता, वृहतपराशरीय-कृषि, निसारः, शिगृ, सौरसूक्त, मनुष्यालयचंद्रिका, राजगृहनिर्माण, दुर्गविधान, वास्तुविद्या, युद्धजयार्णव। प्रौद्योगिकी से सम्बन्धित 18 प्राचीन संस्कृत ग्रन्थों में से 'कश्यपशिल्पम्' सर्वाधिक प्राचीन मानी जाती है। प्राचीन खनन एवं खनिकी से सम्बन्धित संस्क्रित ग्रन्थ हैं- 'रत्नपरीक्षा', लोहार्णणव, धातुकल्प, लोहप्रदीप, महावज्रभैरवतंत्र तथा पाषाणविचार। 'नारदशिल्पशास्त्रम' शिल्पशास्त्र का ग्रन्थ है।
अन्य शास्त्र
न्यायशास्त्र, योगशास्त्र, वास्तुशास्त्र, नाट्यशास्त्र, काव्यशास्त्र, अलंकारशास्त्र, नीतिशास्त्र आदि ।
Source :-Wikipedia
1. राजस्थान में बोली जाने वाली भाषा
उत्तर प्रदेश के पर्यटन स्थल के बारे में मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के पर्यटन स्थल
उत्तर प्रदेश में सभी के लिए आकर्षण की कई चीज़ें हैं।
Source :-Wikipedia
1. राजस्थान में बोली जाने वाली भाषा
राजस्थान के बारे में मुख्य बातें
राजस्थान के बारे में मुख्य बातें
| राजधानी :- | जयपुर |
| सबसे बड़ा शहर :- | जयपुर |
| जनसंख्या :- | 6,85,48,437 |
| घनत्व :- | 200.00 /किमी² |
| क्षेत्रफल :- | 3,42,239.00 किमी² |
| ज़िले :- | 33 |
| राजभाषा :- | हिन्दी |
| गठन :- | 30 मार्च 1956 |
| सरकार :- | राजस्थान सरकार |
| राज्यपाल :- | कलराज मिश्रा |
| मुख्यमंत्री :- | अशोक गहलोत (कांग्रेस) |
| विधानमण्डल :- | एकसदनीय |
| विधान सभा :- | 200 सीटें |
| भारतीय संसद :- | राज्य सभा (10 सीटें) |
| भारतीय संसद :- | लोक सभा (25 सीटें) |
| उच्च न्यायालय :- | राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर |
| डाक सूचक संख्या :- | 30 से 34 |
| वाहन अक्षर :- | RJ |
| आइएसओ 3166-2 :- | IN-RJ |
राजस्थान की जलवायु :-
राजस्थान की जलवायु शुष्क से उप-आर्द्र मानसूनी जलवायु है। अरावली के पश्चिम में न्यून वर्षा, उच्च दैनिक एवं वार्षिक तापान्तर, निम्न आर्द्रता तथा तीव्र हवाओं युक्त शुष्क जलवायु है। दूसरी ओर अरावली के पूर्व में अर्धशुष्क एवं उप-आर्द्र जलवायु है। अक्षांशीय स्थिति, समुद्र से दूरी, समुद्र ताल से से ऊंचाई, अरावली पर्वत श्रेणियों की स्थिति एवं दिशा, वनस्पति आवरण आदि सभी यहाँ की जलवायु को प्रभावित करते हैं।
राजस्थान के प्रथम व्यक्तित्व :-
1. राजस्थान के प्रथम मुख्यमंत्री : हीरा लाल शास्त्री (30 मार्च 1948 से 5 जनवरी 1951 तक ) 2. राजस्थान के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री : टीकाराम पालीवाल (3 मार्च 1952 से 31 अक्टूबर 1952 तक) राजस्थान के चौथे मुख्यमंत्री 3. राजस्थान के प्रथम राज्यपाल : श्री गुरुमुख निहाल सिंह (1 नवंबर 1956 से 16 अप्रैल 1962 तक) 4. राजस्थान के प्रथम मुख्य न्यायाधीश : कमलकांत वर्मा 5. राजस्थान के प्रथम विधानसभा अध्यक्ष : नरोत्तम जोशी 6. राजस्थान के प्रथम पुलिस महानिरीक्षक (IGP) : के. बनर्जी 7. राजस्थान के प्रथम पुलिस महानिदेशक (DGP) : रघुनाथ सिंह 8. राजस्थान की प्रथम महिला मुख्यमंत्री : वसुन्धरा राजे (8 दिसम्बर 2003 से 11 दिसम्बर 2008 तक) 9. राजस्थान की प्रथम महिला राज्यपाल : प्रतिभा पाटिल (8 नवंबर 2004 से 21 जून 2007 तक) 10. राजस्थान की प्रथम महिला विधानसभा अध्यक्ष: सुमित्रा सिंह
शिक्षण संस्थान :-
राज ऋषि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय, अलवर समर्पित शिक्षण संस्थान, टपूकड़ा, अलवर राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर मोदी प्रौद्योगिकी तथा विज्ञान संस्थान, लक्ष्मणगढ़,सीकर जिला (मानद विश्वविद्यालय) वनस्थली विद्यापीठ (मानद विश्वविद्यालय), टोंक राजस्थान विद्यापीठ (मानद विश्वविद्यालय), उदयपुर बिड़ला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान, पिलानी (मानद विश्वविद्यालय), आई. आई. एस. विश्वविद्यालय (मानद विश्वविद्यालय) जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय (मानद विश्वविद्यालय) लाडनूं एलएनएम सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (मानद विश्वविद्यालय) मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मानद विश्वविद्यालय) जयपुर मोहन लाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, जोधपुर राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर बीकानेर विश्वविद्यालय, बीकानेर कोटा विश्वविद्यालय कोटा वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर मौलाना अबुल कलाम आजाद विश्वविद्यालय जोधपुर
राजस्थान के प्रसिद्ध स्थल :-
1. जयपुर :-
1. जयपुर इसके भव्य किलों, महलों और सुंदर झीलों के लिए प्रसिद्ध है, जो विश्वभर से पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। 2. चन्द्रमहल (सिटी पैलेस) महाराजा जयसिंह (द्वितीय) द्वारा बनवाया गया था और मुगल औऱ राजस्थानी स्थापत्य का एक संयोजन है। 3. महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने हवामहल 1799 ई. में बनवाया जिसके वास्तुकार लालचन्द उस्ता थे। 4. आमेर दुर्ग में महलों, विशाल कक्षों, स्तंभदार दर्शक-दीर्घाओं, बगीचों और मंदिरों सहित कई भवन-समूह हैं। 5. आमेर महल मुगल औऱ हिन्दू स्थापत्य शैलियों के मिश्रण का उत्कृष्ट उदाहरण है। 6. एल्बर्ट हॉल नामक म्यूजियम 1876 में, प्रिंस ऑफ वेल्स के जयपुर आगमन पर सवाई रामसिंह द्वारा बनवाया गया था और 1886 में जनता के लिए खोला गया। 7. गवर्नमेण्ट सेन्ट्रल म्यूजियम में हाथीदांत कृतियों, वस्त्रों, आभूषणों, नक्काशीदार काष्ठ कृतियों, लघुचित्रों, संगमरमर प्रतिमाओं, शस्त्रों औऱ हथियारों का समृद्ध संग्रह है। 8. सवाई जयसिंह (द्वितीय) ने अपनी सिसोदिया रानी के निवास के लिए 'सिसोदिया रानी का बाग' भी बनवाया। 9. जलमहल, शाही बत्तख-शिकार के लिए बनाया गया मानसागरझील के बीच स्थित एक सुंदर महल है। 10. 'कनक वृंदावन' अपने प्राचीन गोविन्देव विग्रह के लिए प्रसिद्ध जयपुर में एक लोकप्रिय मंदिर-समूह है। 11. जयपुर के बाजार जीवंत हैं और दुकानें रंग बिरंगे सामानों से भरी है, जिसमें हथकरघा-उत्पाद, बहुमूल्य रत्नाभूषण, वस्त्र, मीनाकारी-सामान, राजस्थानी चित्र आदि शामिल हैं। 12. जयपुर संगमरमर की प्रतिमाओं, ब्लू पॉटरी औऱ राजस्थानी जूतियों के लिए भी प्रसिद्ध है। 13. जयपुर के प्रमुख बाजार, जहां से आप कुछ उपयोगी सामान खरीद सकते हैं, जौहरी बाजार, बापू बाजार, नेहरू बाजार, चौड़ा रास्ता, त्रिपोलिया बाजार और एम.आई. रोड़ हैं। 14. राजस्थान राज्य परिवहन निगम (RSRTC) की उत्तर भारत के सभी प्रसुख गंतव्यों के लिए बस सेवाएं हैं। 15. जयपुर के निकट विराट नगर (पुराना नाम बैराठ) जहाँ पांडवों ने अज्ञातवास किया था, में पंचखंड पर्वत पर वज्रांग मंदिर नामक एक अनोखा देवालय है जहाँ हनुमान जी की बिना बन्दर की मुखाकृति और बिना पूंछ वाली मूर्ति स्थापित है जिसकी स्थापना अमर स्वतंत्रता सेनानी, यशस्वी लेखक महात्मा रामचन्द्र वीर ने की थी।
2. बालोतरा :-
यहा पर वस्र्त की रंगाई छपाई का कार्य होता है और इसकी महत्वपुर्ण बात यह है कि लुणी नदी का जल इस स्थान से पानी खारा(लवणीय)हो जाता है। यह बाड़मेर जिले मे आया हुआ है।
3. भरतपुर :-
1. ‘पूर्वी राजस्थान का द्वार’ भरतपुर, भारत के पर्यटन मानचित्र में अपना महत्व रखता है। 2. भारत के वर्तमान मानचित्र में एक प्रमुख पर्यटक गंतव्य, भरतपुर पांचवी सदी ईसा पूर्व से कई अवस्थाओं से गुजर चुका है। 3. 18 वीं सदी का घना पक्षी अभयारण्य , जो केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान के रूप में भी जाना जाता है। 4. लोहागढ़ आयरन फोर्ट के रूप में भी जाना जाता है, लोहागढ़ भरतपुर के प्रमुख ऐतिहासिक आकर्षणों में से एक है। जिसको कोई नहीं जीत पाया 5. भरतपुर संग्रहालय राजस्थान के विगत शाही वैभव के साथ शौर्यपूर्ण अतीत के साक्षात्कार का एक प्रमुख स्रोत है। 6. एक सुंदर बगीचा, नेहरू पार्क, जो भरतपुर संग्रहालय के पास है। 7. डीग जलमहल एक आकर्षक राजमहल है, जो भरतपुर के जाट शासकों ने बनवाया था।
4. जोधपुर :-
1. राठौड़ों के रूप में प्रसिद्ध एक वंश के प्रमुख, राव जोधा ने जिस जोधपुर की सन 1459 में स्थापना की थी, राजस्थान के पश्चिमी भाग में केन्द्र में स्थित राज्य का दूसरा सबसे बड़ा शहर है और दर्शनीय महलों, दुर्गों औऱ मंदिरों के कारण एक लोकप्रिय पर्यटक गंतव्य है। 2. शहर की अर्थव्यस्था में हथकरघा, वस्त्र उद्योग और धातु आधारित उद्योगों का योगदान है। 3. मेहरानगढ़ दुर्ग, 125 मीटर ऊंचा औऱ 5 किमी के क्षेत्रफल में फैला हुआ, भारत के बड़े दुर्गों में से एक है जिसमें कई सुसज्जित महल जैसे मोती महल, फूल महल, शीश महल स्थित हैं। अन्दर संग्रहालय में भी लघुचित्रों, संगीत वाद्य यंत्रों, पोशाकों, शस्त्रागार आदि का एक समृद्ध संग्रह है। 4. जोधपुर रियासत, मारवाड़ क्षेत्र में 1250 से 1949 तक चली रियासत थी। इसकी राजधानी वर्ष 1950 से जोधपुर नगर में रही।
5. सवाई माधोपुर :-
1. सवाई माधोपुर शहर की स्थापना जयपुर के पूर्व महाराजा सवाई माधोसिंह प्रथम ने 1765 ईस्वी में की थी और इन्हीं के नाम पर 15 मई, 1949 ई. को सवाई माधोपुर जिला बनाया गया। मीणा बाहुल्य इस जिले का ऐतिहासिकता के तौर पर काफी महत्व है। 2. राजस्थान राज्य का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान इसी जिले में स्थित है, जिसे रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान के नाम से जाना जाता है। इस उद्यान के कारण सवाई माधोपुर को 'टाइगर सिटी' के नाम से भी राजस्थान में पहचान मिली हुई है। 3. सवाई माधोपुर जिले में चौहान वंश का ऐतिहासिक रणथंभोर दुर्ग विश्व धरोहर में शामिल है, अपनी प्राकृतिक बनावट व सुरक्षात्मक दृष्टि से अभेद्य यह दुर्ग विश्व में अनूठा है। इस दुर्ग का सबसे प्रसिद्ध शासक महाराजा हम्मीर देव चौहान राजस्थान के इतिहास में अपने हठ के कारण काफी प्रसिद्ध रहा है।
उद्योग :-
1. सूती वस्त्र उद्योग :-
यह राजस्थान का सबसे प्राचीन एवं सुसंगठित उद्योग है। राजस्थान में सबसे पहले 1889 में द कृष्णा मिल्स लिमिटेड की स्थापना देशभक्त सेठ दामोदर दास ने ब्यावर नगर में की थी। यह राजस्थान की पहली सूती वस्त्र मिल थी।
सर्वाजनिक क्षेत्र में तीन मिल है -
1. महालक्ष्मी मिल्स लिमिटेड, ब्यावर अजमेर 2. एडवर्ड मिल्स लिमिटेड, ब्यावर अजमेर 3. विजय काटन मिल्स लिमिटेड, विजयनगर अजमेर
राजस्थान में सहकारी सूती मिल है -
1. गंगापुर - भीलवाड़ा में 2. गुलाबपुरा - भीलवाडा में 3. हनुमानगढ़ में
प्रमुख नीजि सुती मिलें
1. द कृष्णा मिल्स लिमिटेड, ब्यावर, अजमेर (राजस्थान की प्रथम सुती मिल, 1889 में) 2. मेवाड़ टैक्सटाइल मिल्स लिमिटेड - भीलवाड़ा(1938) 3. महाराजा उम्मेद मिल्स लिमिटेड - पाली(1942) 4. राजस्थान स्पीनिंग एण्ड विविंग मिल्स लिमिटेड - भीलवाड़ा(1960)
2. चीनी उद्योग :-
राजस्थान में सर्वप्रथम चित्तौड़गढ़ ज़िले में भोपालसागर नगर में चीनी मिल द मेवाड़ सुगर मिल्स के नाम से सन् 1932 में प्रारम्भ की गई। दूसरा कारखाना सन् 1937 में श्रीगंगानगर में द श्रीगंगानगर सुगर मिल्स के नाम से स्थापित हुआ। इसमें मिल में शक्कर बनाने का कार्य 1949 में प्रारम्भ हुआ। 1958 में इस चीनी मिल को राज्य सरकार ने अधिगृहीत कर लिया तथा यह सार्वजनिक क्षेत्र में आ गई। 1975 में बूंदी ज़िले के केशोराय पाटन में चीनी मिल सहकारी क्षेत्र में स्थापित की गई। वर्तमान में बंद है सन् 1919 में उदयपुर में चीनी मिल निजी क्षेत्र में स्थापित की गई। चुकन्दर से चीनी बनाने के लिए श्रीगंगनगर सुगर मिल्स लिमिटेड में एक योजना 1968 में आरम्भ की गई थी। चीनी उद्योग :- 1. द मेवाड़ शुगर मिल्स लिमिटेड - भोपाल सागर, चित्तौड़गढ़ नीजि क्षेत्र में कार्यरत, राजस्थान की प्रथम चीनी मिल्स - 1932 2. गंगानगर शुगर मिल्स लिमिटेड - कमिनपुरा, गंगानगर 3. केशवरायपाटन सहकारी शुगर मिल्स लिमिटेड - केशवरायपाटन, बूंदी(सहकारी क्षेत्र में)
3. सीमेन्ट उद्योग :-
सीमेन्ट उद्योग की दृष्टि से 'राजस्थान का पूरे भारत में प्रथम स्थान है। यहां पर सर्वप्रथम 1907 में समुद्री सीपियों से सीमेन्ट बनाने का प्रयास किया गया था। 1915 ई. राजस्थान में लाखेरी, बूंदी में क्लिक निक्सन कम्पनी द्वारा सर्वप्रथम एक सीमेन्ट संयंत्र स्थापित किया गया। 1914 में इस कारखाने में सीमेन्ट बनाने का कार्य प्रारम्भ किया गया।
4. काँच उद्योग
राजस्थान में काँच प्राप्ति के मुख्य स्थल जयपुर, बीकानेर, बूंदी तथा धौलपुर ज़िले है जहां उपयुक्त रूप से काँच की प्राप्ति होती है। द हाई टेक्निकल प्रीसीजन ग्लास वर्क्स सार्वजनिक क्षेत्र में धौलपुर में राजस्थान सरकार का उपक्रम है जो श्रीगंगानगर सुगर मिल्स के अधीन है। काँच उद्योग के मामले में राजस्थान उत्तर प्रदेश के बाद दुसरे स्थान पर है।
5. ऊन उद्योग
संपूर्ण भारतवर्ष में 42% ऊन राजस्थान से उत्पादित होती है। इस कारण राजस्थान भर में कई ऊन उद्योग की मिलें विद्यमान है जिसमें स्टेट वूलन मिल्स (बीकानेर ), जोधपुर ऊन फैक्ट्री, विदेशी आयात - निर्यात संस्था, कोटा इत्यादि है।
Source :-Wikipedia
1. राजस्थान में बोली जाने वाली भाषा
कुछ जन्तुओं के वैज्ञानिक नाम
गाय -- Bos primigenius taurus (बोस् प्रीमीगेन्यूस् तौरूस्) सांड (Bull) -- Bos primigenius taurus बैल -- Bos primigenius taurus भैंस -- Bubalus bubalis (बूबालूस् बूबालीस्) ज़ेबू (Zebu) -- Bos primigenius indicus (बोस् प्रीमीगेन्यूस् ईन्दीकूस्) कुत्ता -- Canis lupus familiaris (कानीस् लूपूस् फ़ामील्यारीस्) कुतिया -- Canis lupus familiaris पिल्ला (Puppy) -- Canis lupus familiaris बिल्ली -- Felis catus (फ़ेलीस् कातूस्) ऊंट -- Camelus dromedarius (कामेलूस् द्रोमेदार्यूस्) घोड़ा / अश्व (Horse) -- Equus ferus caballus (एकुउस् फ़ेरूस् काबाल्लूस्) टट्टू (Pony) -- गधा (Donkey/Ass) -- Equus africanus asinus (एकुउस् आफ़्रीकानूस् आसीनूस्) खच्चर (Mule -- अज / बकरा (Goat) -- Capra aegagrus hircus (काप्रा ऐगाग्रूस् हीर्कूस्) बकरी का बच्चा / मेमना (Kid/ Lamb) -- Capra aegagrus hircus भेड़ (Sheep) -- Ovis aries (ओवीस् आर्येस्) भेडी (Eve) -- Ovis aries भेड का बच्चा (Faun) -- Ovis aries सूअर (Pig) -- Sus scrofa domestica (सूस् स्क्रोफ़ा दोमेस्तीका) सूअर (Hog) -- Sus scrofa domestica याक (Yak) -- Bos grunniens (बोस् ग्रून्न्येन्स्) खरहा (Hare) -- हाथी (Asian Elephant) -- Elephas maximus (एलेफास् माक्सीमूस्) बाघ / व्याघ्र (Tiger) -- Panthera tigris (पान्थेरा तीग्रीस्) शेर / सिंह (Lion) -- Panthera leo (पान्थेरा लेओ) लोमड़ी (Fox) -- Canidae (कनीदै) चीता / तेंदुआ (Leopard) -- Panthera pardus (पान्थेरा पार्दूस्) जंगली सूअर (Boar) -- भालू / रिछ (Bear) -- Ursus thibetanus (ऊर्सूस् थीबेतानूस्) Nevala) -- Mongoose -- सियार / जंबुक (Jackal) -- Canis aureus (कानीस् औरेऊस्) ख़रगोश (Rabbit) -- Oryctolagus cuniculus (ओरइउक्तोलागूस् कूनीकूलूस्) लंगूर (Ape) -- Hominoidea (होमीनीदेआ) बनमानुप (Gorrilla) -- (गोरील्ला) बारहसिंहा (Stag) -- मृग / हिरन (Deer) --
Source :-Wikipedia
राजस्थान में बोली जाने वाली भाषा
राजस्थानी
बोलने का स्थान :- भारत, पाकिस्तान मातृभाषी वक्ता :- 2,00,00,000
भाषा परिवार
हिन्द-यूरोपीय :-- हिन्द-ईरानी
- हिन्द-आर्य
- संस्कृत
- केन्द्रीय क्षेत्र (हिन्दी)
- राजस्थानी
लिपि :- देवनागरी
राजस्थानी भाषा राजस्थान में बोली जाने वाली भाषाओं को कहा जाता है। राजस्थानी भाषाऐं भारत में लगभग नौ करोङ लोगो के द्वारा बोली जाती है।इस भाषा समूह की सर्वाधिक बडी बोली मारवाड़ी है, जो लगभग 4.5 करोङ से 5 करोङ लोगो द्वारा बोली जाती है। हिन्दी, ब्रजभाषा, मेवाती, मारवाड़ी,शेखावाटी, हाड़ौती जैसी कई भाषाओं के मिश्रित झुंड को राजस्थानी भाषा का नाम दिया गया इसे पहले मूङिया(बणिया या महाजनी) लिपि मे लिखते थे।इसे वर्तमान में देवनागरी में लिखा जाता है। साहित्यिक आधार पर सही अर्थों में इस भाषा का नाम ब्रजभाषा होना चाहिए। राजस्थानी भाषाऐं भारत के राजस्थान प्रान्त व मालवा क्षेत्र तथा पाकिस्तान के कुछ भागों में करोड़ों लोगों द्वारा बोली जाती हैं। इन भाषाओं का इतिहास बहुत पुराना है। इन भाषाओं में प्राचीन साहित्य विपुल मात्रा में उपलब्ध है। इन भाषाओं में विपुल मात्रा में लोक गीत, संगीत, नृत्य, नाटक, कथा, कहानी आदि उपलब्ध हैं। इन भाषाओं को सरकारी मान्यता प्राप्त नहीं है। इस कारण इन्हें विद्यालयों में पढाया नहीं जाता है। इस कारण शिक्षित वर्ग धीरे धीरे इन भाषाओं का उपयोग छोड़ रहा है, परिणामस्वरूप, ये भाषाऐं धीरे धीरे ह्रास की और अग्रसर है। कुछ मातृभाषा प्रेमी अच्छे व्यक्ति ऐसी भाषाओं को सरकारी मान्यता दिलाने के प्रयास में लगे हुए हैं। इसी प्रयास हेतु कवि सुखवीर सिहं कविया का गीत "मायड़ बोली" एक प्रतिगीत एक प्रेरक गीत के रूप में है जो राजस्थानी भाषाओं की महत्ता बताता है और ज्यादा से ज्यादा राजस्थानी भाषाऐं बोलने हेतु प्रेरित करता है - मीठो गुड़ मिश्री मीठी, मीठी जेडी खांड मीठी बोली मायडी और मीठो राजस्थान ।। गण गौरैयाँ रा गीत भूल्या भूल्या गींदड़ आळी होळी नै, के हुयो धोरां का बासी, क्यूँ भूल्या मायड़ बोली नै ।। कालबेलियो घुमर भूल्या नखराळी मूमल झूमर भूल्या लोक नृत्य कोई बच्या रे कोनी क्यू भूल्या गीतां री झोळी नै, कै हुयो धोरां का बासी क्यू भूल्या मायड़ बोली नै ।। जी भाषा में राणा रुओ प्रण है जी भाषा में मीरां रो मन मन है जी भाषा नै रटी राजिया, जी भाषा मैं हम्मीर रो हट है धुंधली कर दी आ वीरां के शीस तिलक री रोळी नै, के हुयो धोरां का बासी, क्यू भूल्या मायड़ बोली नै ।। घणा मान रीतां में होवै गाळ भी जठ गीतां में होवे प्रेम भाव हगळा बतलाता क्यू मेटि ई रंगोंळी नै, के हुयो धोरां का बासी क्यू भूल्या मायड़ बोली नै ।। पीर राम रा पर्चा भूल्या माँ करणी री चिरजा भूल्या खम्माघणी ना घणीखम्मा है भूल्या धोक प्रणाम हमझोळी नै के हुयो धोरां का बासी, क्यू भूल्या मायड़ बोली नै ।। बिन मेवाड़ी मेवाड़ कठै मारवाड़ री शान कठै मायड़ बोली रही नहीँ तो मुच्चयाँळो राजस्थान कठै ।। (थारी मायड़ करे पुकार जागणु अब तो पड़सी रै - Repeat ) - सुखवीर सिंह कविया
Source :-Wikipedia
अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताएँ
ब्रिसबेन टेनिस (2018) :- पुरुष एकल :- निक किर्गियोस (आस्ट्रेलिया) महिला एकल :- एलिना स्वितोलीना (यूक्रेन) हॉपमैेन कप (2018) :- स्विट्जरलैण्ड (तीसरी बार) डेविस कप (2017) :- फ्रांस (10वीं बार) कतर ओपर (2018) पुरुष एकल :-गेल मोंफिल्स (फ्रांस) पुरुष युगल :-ओलिवर माराच (ऑस्ट्रिया) एवं मैट पेविक (कोएशिया) डेनमार्क ओपन सुपर सीरिज टेनिस (2017) :- किदाम्बी श्रीकांत (भारत) फीफा अंडर-20 (2017) :- इ्ग्लैण्ड भारत-दक्षिण अफ्रीका टेस्ट सीरिज (2018):- द. अफ्रीका ( 2 - 1 ) भारत-दक्षिण अफ्रीका एक दिवसी सीरिज ( 2018 ):- भारत (5 - 1 ) आईसीसी-अंडर-19 (2018) :- भारत (चौथी बार) ऐशेज सीरिज (2017-18) :- आस्ट्रेलिया (4 - 0) भारत-श्रीलंका क्रिकेट श्रृंखला (2017) टेस्ट मैच :- भारत (1 - 0) एक दिवसी मैच :- भारत (2 - 1) टी-20 सीरिज :- भारत ( 3- 0 ) भारत-न्यूजीलैण्ड क्रिकेट श्रृंखला (2017) एक दिवसी सीरीज :- भारत (2 - 1) टी-20 सीरीज :- भारत ( 2 - 4) सुल्तान जोहोर कप (2017) :- आस्ट्रेलिया स्वीडिश ओपन (2018) पुरुष एकल :- सिद्धार्थ प्रताप सिंह (भारत) महिला एकल :- मिशेल स्कॉइसटुप (डेनमार्क) इंडिया ओपन बैडमिंटन सीरीज (2018) पुरुष एकल :- शी युकी (चीन) महिला एकल :- बेईवान झेंग (अमेरिका) चेन्नई ओपन टेनिस (2018) पुरुष एकल :- जार्डन थॉत्सन (ऑस्ट्रेलिया) पुरुष युगल :- श्रीराम बालाजी एवं विष्णु वर्द्धन (दोनों भारत) सुल्तान अजलान शाह, हॉकी (2018) :- आस्ट्रेलिया
संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित वर्ष
| अन्तरांष्ट्रीय पर्यटन वर्ष | 1967 |
| अन्तराष्ट्रीय मानवाधिकार वर्ष | 1968 |
| अन्तर्राष्ट्रीय शिक्षा वर्ष | 1970 |
| अन्तर्राष्ट्रीय पुस्तक वर्ष | 1972 |
| अन्तराष्ट्रीय जनसंख्या वर्ष | 1974 |
| अन्तराष्ट्रीय महिला वर्ष | 1975 |
| अन्तर्राष्ट्रीय बाल वर्ष | 1979 |
| अन्तराष्ट्रीय विकलांग वर्ष | 1981 |
| विश्व संचार वर्ष | 1983 |
| अन्तर्राष्ट्रीय युवा वर्ष | 1985 |
| अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति वर्ष | 1986 |
| बेघर लोगों के लिए अन्तर्राष्ट्रीय आवास वर्ष | 1987 |
| अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता वर्ष | 1990 |
| अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष वर्ष | 1992 |
| अन्तर्राष्ट्रीय परिवार वर्ष | 1994 |
| विकास दशक का शुरुआती वर्ष | 2000 |
| अन्तर्राष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण वर्ष | 2001 |
| अन्तर्राष्ट्रीय पर्वत वर्ष | 2002 |
| अन्तर्राष्ट्रीय स्वच्छ जल वर्ष | 2003 |
| अन्तर्राष्ट्रीय चावल वर्ष | 2004 |
| अन्तर्राष्ट्रीय सूक्ष्म साख का वर्ष | 2005 |
| अन्तर्राष्ट्रीय मरुस्थल और मरुस्थलीकरण वर्ष | 2006 |
| अन्तर्राष्ट्रीय ध्रुव वर्ष | 2007 |
| अन्तर्राष्ट्रीय आलू वर्ष और अन्तर्राष्ट्रीय स्वच्छता वर्ष | 2008 |
| अन्तर्राष्ट्रीय प्राकृतिक फाइबर वर्ष, अन्तर्राष्ट्रीय मेल-मिलाप वर्ष | 2009 |
| अन्तर्राष्ट्रीय जैव विविधता वर्ष और अन्तर्राष्ट्रीय युवा वर्ष | 2010 |
| अन्तर्राष्ट्रीय वन्य वर्ष | 2011 |
| अन्तर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष और सबके लिए सतत् ऊर्जा का वर्ष | 2012 |
| जल सहयोग के लिए अन्तर्राष्ट्रीय वर्ष और अन्तर्राष्ट्रीय क्विनोआ वर्ष | 2013 |
| अन्तर्राष्ट्रिय लघु द्वीपीय राष्ट्र विकास वर्ष, क्रिस्टिलोग्राफी वर्ष व पारिवारिक कृषि वर्ष | 2014 |
| अन्तर्राष्ट्रीय प्रकाश वर्ष, अन्तर्राष्ट्रीय मृदा वर्ष | 2015 |
| अन्तर्राष्ट्रीय दलहन वर्ष | 2016 |
| सतत विकास एवं पर्यटन वर्ष | 2017 |
| बाजरा वर्ष | 2018 |
भारत में सबसे बड़ा , लम्बा एवं ऊँचा
| सबसे लम्बी नदी | गंगा नदी |
| सबसे लम्बी नहर | इन्दिरा गांधी नहर (राजस्थान ) |
| दक्षिण भारत की सबसे लम्बी नदी | गोदावरी |
| भारत की सबसे लम्बी सहायक नदी | यमुना |
| सबसे अधिक मार्ग बदलने वाली नदी | कोसी नदी |
| डेल्टा न बनाने वाली सबसे बडी नदी | नर्मदा व ताप्ती |
| सबसे गहरी नदी घाटी | भागीरथी व अलकनन्दा |
| सबसे बड़ी कृत्रिम झील | गोविन्द सागर (भाखड़ा नांगल) |
| सबसे बड़ा नदी द्वीप | माजुली (ब्रह्मपुत्र नदी , असोम ) |
| सबसे बड़ी झील | वूलर झील (जम्मू-कश्मीर ) |
| सबसे ऊंचा गुरुत्वीय बाँध | भाखड़ा नांगल बाँध (पंजाब) |
| सबसे बड़ा डेल्टा | सुन्दरवन डेल्टा (प. बंगाल ) |
| सबसे ऊँचा झरना | जोग या गरसोप्पा (कर्नाटक) |
| सबसे बड़ा लीवर पुल | हावड़ा ब्रिज (कोलकाता ) |
| सबसे लम्बा रेलमार्ग | डिब्रूगढ़ से कन्याकुमारी |
| सबसे बड़ा प्राकृतिक बन्दरगाह | मुम्बई (महाराष्ट्र ) |
| सबसे लम्बा राष्ट्रीय राजमार्ग | राष्ट्रीय राजमार्ग नं. 7 (वाराणसी से कन्याकुमारी ) |
| सबसे लम्बी तट रेखा वाला राज्य | गुजरात (200 किमी.) |
| खारे पानी की सबसे बडी तटीय झील | चिल्का झील (ओडिशा) |
| मीठे पानी की सबसे बडी झील | वूलर झील (जम्मू-कश्मीर ) |
| सबसे लम्बा बाँध | हीराकुड बाँध (ओडिशा) |
| सबसे लम्बा समुद्री तट | मैरिना बीच (चेन्नई ) |
| सबसे लम्बी तटरेखा वाला द. भारत का राज्य | आन्ध्र प्रदेश (1100 किमी.) |
| सर्वाधिक क्षेत्रफल वाला राज्य | राजस्थान |
| सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य | उत्तर प्रदेश |
| सर्वाधिक क्षेत्रफल वाला जिला | लद्दाख |
| सबसे तेज चलने वाली ट्रेन | गतिमान एक्सप्रेस (हजरत निजामुद्दीन से आगरा कैण्ट) |
| सबसे ऊंचा हवाई पत्तन | लेह (लद्दाख) |
| सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित युद्ध स्थल | सियाचीन ग्लेशियर |
| सबसे बड़ा तारामण्डल | बिड़ला प्लैनेटोरियम (कोलकाता ) |
| सबसे लम्बा सडक पुल | ढोला-सादिया (असम, 9.15 किमी.) |
| सबसे बड़ा पशुओं का मेला | सोनपुर (बिहार) |
| सबसे ऊंची मीनार | कुतुबमीनार (दिल्ली ) |
| सबसे बड़ा रेगिस्तान | थार (राजस्थान ) |
| सबसे बड़ा गुफा मन्दिर | कैलाश मन्दिर (एलोरा) |
| सबसे बड़ा चिड़ियाघर | जूलोजिकल गार्डन (कोलकाता ) |
| सबसे बड़ा अजायबघर | कोलकाता अजायबघर |
| सबसे बड़ा गुम्बज | गोल गुम्बज (बीजापुर) |
विश्व कप फुटबॉल : फीफा
फुटबॉल का जन्मदाता इंग्लैण्ड है | इंग्लैण्ड में विश्व का पहला फुटबॉल क्लब 1857 ई. में “शेफील्ड फूटबॉल क्लब” नाम से गठित हुआ। विश्व की सबसे बड़ी फुटबॉल संस्था “इण्टरनेशनल फुटबॉल एसोसिएशन” ( फीफा ) है| जिसका मुख्यालय पेरिस (फ्रांस) में है। पहला विश्व कप फुटबॉल ऊरुग्वे में 1930 ई. में आयोजित किया गया था। यह प्रति चार वर्ष बाद आयोजित किया जाता है। भारत में फुटबॉल का खेल अंग्रेजों द्वारा लाया गया है और भारत का पहला फुटबॉल क्लब डलहौजी क्लब था।
विश्व कप फुटबॉल के विजेता ( 1930 से 2014 )
| क्रम संख्या | वर्ष | फाइनल का स्थान | विजेता | उपविजेता |
|---|---|---|---|---|
| 1. | 1930 | मोण्टेवीडिओ | उरुग्वे | अर्जेण्टीना |
| 2. | 1934 | रोम | इटली | चेकोस्लोवाकिया |
| 3. | 1938 | पेरिस | इटली | हगरी |
| 4. | 1950 | रिओ डि जेनेरो | उरुग्वे | ब्राजील |
| 5. | 1954 | स्टाकहोम | प. जर्मनी | स्वीडन |
| 6. | 1958 | बर्न | ब्राजील | हगरी |
| 7. | 1962 | सांतियागो | ब्राजील | चेकोस्लोवाकिया |
| 8. | 1966 | लन्दन | इंग्लैण्ड | प. जर्मनी |
| 9. | 1970 | मैक्सिको सिटी | ब्राजील | इटली |
| 10. | 1974 | म्यूनिख | प. जर्मनी | नीदरलैण्ड्स |
| 11. | 1978 | ब्यूनेस आयर्स | अर्जेण्टीना | नीदरलैण्ड्स |
| 12. | 1982 | मैड़िड | इटली | प. जर्मनी |
| 13. | 1986 | मैक्सिको | अर्जण्टीना | जर्मनी |
| 14. | 1990 | रोम | प. जर्मनी | अर्जण्टीना |
| 15. | 1994 | लॉस एजिल्स | ब्राजील | इटली |
| 16. | 1998 | पेरिस | फ्रांस | ब्राजील |
| 17. | 2002 | याकोहामा | ब्राजील | जर्मनी |
| 18. | 2006 | जर्मनी | इटली | फ्रांस |
| 19 | 2010 | जोहांसबर्ग (द. अफ्रीका) | स्पेन | हॉलेंड |
| 20. | 2014 | ब्राजील | जर्मनी | अर्जण्टीना |
| 21. | 2018 | रूस | रूस | - |
| 22. | 2022 | कतर | प्रस्तावित | - |
क्रिकेट का सम्राट : सचिन तेन्दुलकर
सचिन तेन्दुलकर के बारे में संक्षिप्त टिप्पणी :-
सचिन रमेश का जन्म 24 अप्रैल, 1973 को मुम्बई में हुआ वह क्रिकेट के इतिहास में सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में गिने जाते हैं। सन् 1989 में अन्तर्राष्ट्रीय में पदार्पण के पश्चात् वे बल्लेबाजी में कई कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं। उन्होंने टैस्ट व एकदिवसीय क्रिकेट दोनों में सर्वाधिक शतक अर्जित किये हैं।वे टैस्ट क्रिकेट में सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। एकदिवसीय मैचों में भी उन्हें सर्वाधिक रन बनाने का कीर्तिमान प्राप्त है। उन्होंने अपना प्रथम श्रेणी क्रिकेट मैच मुम्बई के लिए 14 वर्ष की उम्र में खेला | उन्होंने 16 वर्ष की उम्र में अन्तर्राष्ट्रीय खेल जीवन की शुरुआत 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ कराची से की। राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित एकमात्र क्रिकेट खिलाडी हैं। वे सन् 2008 में पद्म विभूषण से भी सम्मानित किये जा चुके हैं | उनके प्रशंसक उन्हें प्यार से लिटिल मास्टर व मास्टर ब्लास्टर तथा क्रिकेट का भगवान भी कह कर पुकारते हैं। क्रिकेट जगत् के महानतम खिलाड़ियों में से एक सर डोनाल्ड ब्रेडमेन ने सचिन की यह कहते प्रशंसा की कि पिछले 50 वर्षों में अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले बेशुमार बल्लेबाजों में सिर्फ सचिन उनकी शैली के निकट पहुँच सके हैं। सचिन ने शारदाश्रम विद्यामन्दिर में अपनी शिक्षा ग्रहण की | वहीं पर उन्होंने अपने प्रशिक्षक (कोच) रमाकान्त अचरेकर के सान्निध्य में अपने क्रिकेट जीवन का आगाज किया | 1988 में स्कूल के हॉरिसशील्ड मैच के दौरान साथी बल्लेबाज विनोद काम्बली के साथ सचिन ने ऐतिहासिक 664 रनों की अविजित साझेदारी की | इस धमाकेदार जोडी के अद्वित्य प्रदर्शन के कारण एक गेंदबाज तो रो दिया और विरोधी पक्ष ने मैच आगे खेलने से इनकार कर दिया ।
सचिन के कीर्तिमान
सचिन ने बांग्लादेश के मीरपुर में अपना 100 वाँ शतक पूरा किया। सचिन एकदिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच में दोहरा शतक (200 रन) बनाने वाले विश्व के पहले बल्लेबाज बने | एकदिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय मैचों में सर्वाधिक 49 शतक | एकदिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय मुकाबलों में सर्वाधिक 18,426 रन हैं। एकदिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय विश्वकप मुकाबलों के सर्वाधिक रन हैं। टेस्ट मैच में सर्वाधिक 51 शतक | टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक 15,921 रन बनाने वाले विश्व के पहले बल्लेबाज बने | एकदिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय मुकाबले में सर्वाधिक बार मैन ऑफ द सीरीज का रिकॉर्ड। एकदिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय मुकाबले में सर्वाधिक बार मैन ऑफ द मैच का रिकॉर्ड ।
सचिन को मिले पुरस्कार/सम्मान
| क्रम संख्या | पुरस्कार | वर्ष |
|---|---|---|
| 1. | अर्जुन पुरस्कार | 1994 |
| 2. | विजडन क्रिकेटर सूची में नाम | 1997 |
| 3. | राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार | 1997-98 |
| 4. | पद्मश्री | 1999 |
| 5. | विश्व कप में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट | 2003 |
| 6. | पद्म विभूषण | 2008 |
| 7. | आईसीसी. क्रिकेटर ऑफ द ईयर | 2010 |
| 8. | एल. जी. पीपुल्स चॉइस अवार्ड | 2010 |
| 9. | राज्यसभा के लिए मनोनयन | 2012 |
| 10. | ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया अवार्ड | 2012 |
शिवाजी एवं मराठा साम्राज्य
17 वीं शताब्दी में मुगल साम्राज्य के विघटन की प्रक्रिया प्रारम्भ होने के साथ ही देश में स्वतन्त्र राज्यों की स्थापना का जो सिलसिला आरम्भ हुआ उनमें राजनीतिक दृष्टि से सर्वाधिक शक्तिशाली राज्य मराठों का था। ग्राण्ट डफ के अनुसार सत्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में मराठों का उदय “आकस्मिक अग्निकाण्ड" की भाँति हुआ। मराठा साम्राज्य के संस्थापक शिवाजी थे।
शिवाजी (1627-80 ई)
जन्म :- 19 फरवरी, 630 ई. पिता का नाम :- शाहजी भौंसले माता का नाम :- जीजाबाई पत्नी का नाम :- तुकाबाई मोहिते, साइबाई निम्बालकर धार्मिक गुरु :- स्वामी रामदास (धरकरी सम्प्रदाय) गुरु व संरक्षक :- दादा कोणदेव राजधानी :- रायगढ़ व्यक्तित्व पर प्रभाव :- माता जीजाबाई राज्याभिषेक :- 14 जून, 1674 उपाधि :- छत्रपति, राजा (औरंगजेब द्वारा दी गयी) निधन :- 3 अप्रैल, 1680 शिवाजी के व्यक्तित्व पर महत्वपूर्ण प्रभाव माता जीजाबाई का पड़ा | शिवाजी ने “हिन्दू पद पादशाही” अंगीकार की और हिन्दुत्व धर्मोद्धारक की उपाधि धारण की। सर्वप्रथम शिवाजी ने 1648 ई. में बीजापुर के सिंहगढ़ के किले पर अधिकार किया। तत्पश्चात् 1646 ई. में उन्होंने तोरण पर अधिकार कर लिया। 1656 ई. तक शिवाजी ने चाकन, पुरन्दर, बारामती, सूपा, तिकोना, लोहगढ़ आदि किलों पर अधिकार कर लिया। 1656 ई. में शिवाजी की महत्वपूर्ण विजय जावली की थी। जावली एक मराठा सरदार चन्द्रराव मोरे के अधिकार में था | अप्रैल 1656 ई. में उन्होंने रायगढ़ के किले पर अधिकार कर लिया, जिसे उन्होंने अपनी राजधानी बनाया । शिवाजी की विस्तारवादी नीति से बीजापुर शासक सशंकित हो उठा, उसने शिवाजी की शक्ति को दबाने तथा कैद करने के लिए अपने योग्य सरदार अफजल खाँ को भेजा। ब्राह्मण दूत कृष्णाजी भास्कर से अफजल खाँ की मंशा का पता शिवाजी को चला। शिवाजी ने 2 नवम्बर, 1659 ई. को अफजल खाँ की हत्या कर दी। 1660 ई. में मुगल शासक औरंगजेब ने शाइस्ता खाँ को शिवाजी को समाप्त करने के लिए दक्षिण का गवर्नर बनाकर भेजा। शाइस्ता खाँ ने बीजापुर के शासक से मिलकर शिवाजी को समाप्त करने की योजना बनाई | शिवाजी ने अफजल खाँ पर रात्रि में चुपके से आक्रमण कर दिया। अफजल खाँ घबराकर भाग गया। शिवाजी ने 1664 ई. में एवं 1679 ई. में सूरत को लूटा । 1665 ई. में शिवाजी की जयसिंह से पुरन्दर की सन्धि हुई थी। जिसके अनुसार 1666 ई. में शिवाजी मुगल दरबार आगरा पहुँचे | शिवाजी मुगल दरबार (जयपुर भवन आगरा) में कैद से सफलतापूर्वक निकल कर भागे एवं 22 सितम्बर, 1666 ई. को रायगढ़ पहुँचे ।
निम्न जाति आन्दोलन
ज्योतिबा फूले ने अपनी पुस्तक “गुलामगिरी" (1872) तथा *सत्यशोधक समाज” जैसी पुस्तकों और संगठनों द्वारा निम्न जातियों को ब्राह्मणों और उनके धार्मिक ग्रन्थों से सुरक्षा दिलाने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने हरिजनों या दलितों के कल्याण एवं अछूतोद्वार हेतु 1924 ई. में अखिल भारतीय दलित वर्ग की स्थापना की तथा 1927 ई. में उन्होंने “बहिष्कृत भारत” नामक पत्रिका का प्रकाशन किया । राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सर्वप्रथम अछूतों को हरिजन (भगवान के जन) का नाम दिया साथ ही इनके कल्याण के लिए 1932 ई. में "अखिल भारतीय अस्पृश्यता निवारण संघ" की स्थापना की, इसी संस्था को बाद में “हरिजन सेवक संघ” के नांम से जाना गया। 1906 ई. में बी. आर. शिन्दे ने “डिप्रेस्ड क्लासेज मिशन सोसाइटी” की स्थापना की | 1925 ई. में बी. रामास्वामी नायकर ने दक्षिण भारत में “आत्मसम्मान आन्दोलन” चलाया था। यह आन्दोलन दक्षिण भारत में ब्राह्मणों द्वारा जातीय भेदभाव के विरोध में प्रारम्भ किया गया था। सी. एन. मुदालियर , टी. एम. नायर, पी. टी. चेननी ने दक्षिण भारत में अस्पृश्यता को समाप्त के लिए 96 ई. में “जस्टिस पार्टी" की स्थापना की | "गुरु वायूर सत्याग्रह” दलित जातियों के मन्दिर प्रवेश के मुद्दे पर हुआ। इस आन्दोलन के नेतृत्वकर्ता के. केलप्पण थे | इस आन्दोलन में पी. कृष्णपिल्लै व ए. के. गोपाल जैसे नेताओं ने भाग लिया। नदार आन्दोलन द्वारा 1925 ई. में तमिलनाडु में सभाओं के माध्यम से सामाजिक भेदभाव, अस्पृश्यता का विरोध करना था तथा नदार जाति के सामाजिक कल्याण को प्राथमिकता देना था।
निम्न जाति आंन्दोलन
| संस्था | स्थान | संस्थापक | वर्ष |
|---|---|---|---|
| डिप्रेस्ड क्लास मिशन सोसायटी | बम्बई | वी .आर. शिन्दे | 1906 |
| बहुजन समान आंदोलन | महाराष्ट्र | शंकर राव जाधव | - |
| अखिल भारतीय अस्पृश्यता निवारण संघ | बम्बई | महात्मा गाँधी | 1932 |
| सत्य शेधक समाज | बम्बई | ज्योतिबा फूले | 1873 |
| “दि आल इण्डिया डिप्रेस्ड क्लास फेडरेशन" | बम्बई | डॉ. भीमराव अम्बेडकर | 1920 |
| बहिष्कृत हितकारिणी सभा | बम्बई | डॉ. भीमराव अम्बेडकर | 1924 |
| समाज समता संघ | बम्बई | डॉ. भीमराव अम्बेडकर | 1927 |
| ऑल इण्डिया डिप्रेस्ड क्लास एसोसिएसन | बम्बई | महात्मा गाँधी | 1932 |
| अनुसूचित जाति परिसंघ | - | डॉ. भीमराव अम्बेडकर | 1942 |
दक्षिण भारत में निम्न जाति आन्दोलन
| संस्था | स्थान | संस्थापक | वर्ष |
|---|---|---|---|
| अरुविप्पुरम आंदोलन | केरल | नारायण गुरु | 1888 |
| जस्टिस आन्दोलन (न्याय आन्दोलन) | द. भारत | सी एन. मुदलियर, टी एम. नायर, पी. त्यागराज | 1916 |
| आत्म-सम्मान आन्दोलन | मद्रास | ई वी. रामास्वामी नायकर उर्फ पेरियार | 1920 |
| नायर सर्विस सोसायटी | मद्रास | मन्नार पद्मानाभ पिल्लई | 1914 |
| प्रजा मित्र मण्डली | मद्रास | सी.आर. रेड्डी | - |
| वायकोम सत्याग्रह | त्राणकोर (केरल) | के पी केशव मेनन तथा ई वी रामास्वामी नायकर | 1924 |
| गुरुवायूर सत्याग्रह | केरल | के. केलप्पन | 1931-36 |